Wednesday, September 21, 2016

Bhajans

Bhajans (भजन) Lyrics in Hindi
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की
Aarti kunj bihari ki, sri giridhar krishan murari ki
बृज के नंदलाला राधा के सांवरिया
Brij ke Nandlaala, Radha ke Saavriya
सांवरिया, मीठी मीठी बाजे, मधुर तेरी बाँसुरिया
Saavariya meethi meethi baaje madhur teri bansuriya
भूलो मत प्यारे, बिहारीजी का नाम
Bhoolo mat pyare Bihariji kaa naam
मुझे दे दो भजन वाली वो माला।
Mujhe de do bhajanwali vo mala
राम नाम के हीरे मोती, मैं बिखराऊँ गली गली
Ram naam ke heeray moti
ऐसो चटक मटक सो ठाकुर
Aiso chatak matak so thakur
छोटी छोटी गैया, छोटे छोटे ग्वाल
Choti choti gaiya, chotey chotey gwaal
बांके बिहारी मुझको देना सहारा
Banke Bihari mujhko dena sahaara
मन्दिर मे रहते हो भगवन
Mandir mein rahtey ho bhagwaan
मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले
Mujhe charno se laga le
छीन लिया मेरा भोला सा मन
Cheen liya mera bhola sa man
कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
Koi kahe govinda koi gopala
मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है,
Mujhe tumne data bahut kuch diya hai
अपनी वाणी में अमृत घोल
Apni vaani mein amrit ghol
करदो करदो बेडा पार, राधे अलबेली सरकार
Kardo kardo beda paar
किशोरी इतना तो कीजो, लाड़ली इतना तो कीजो,
Kishori itna toe kijay
श्यामा तेरे चरणों की, राधे तेरे चरणों की
Shyama tere charno ki
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन
Aisi laagi lagan meri ho gayi magan
भये प्रगट कृपाला, दीनदयाला, कौशल्या हितकारी।
Bhaye prakat kripala, deen dayala
श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
Sri ram Chandra kripalu bhajman
राम चरण सुखदाई, राम चरण सुखदाई
Ram charan sukhdai, bhaj man ram charan sukdai
भरत भाई, कपि से उरिन हम नाहीं
Bhart bhai kapi se urin hum naahi
प्रेम मुदित मन से कहो, राम राम राम
Prem mudit mun se kaho raam raam raam
रघुवर तुमको मेरी लाज ।
Raghuvar tumko meri laaj
तन के तम्बूरे में, दो सांसो की तार बोले
Tan ke tamboore mein do
पार करो मेरा बेडा भवानी
Paar karo mera beda bhawani
तू तो काली रे कल्याणी है माँ,
Tu toe kaali re kalyaani hai maa
जगजननी जय जय माँ
Jagjanani Jai Jai Maa
ओम जय शिव ओंकारा।
Om Jai Shiv Omkar
शिव संकर तेरी जटाओ से बहती है गंग धारा
Shiv Shankar teri jaatoye se
मिलता है सच्चा सुख केवल, शिवजी तुम्हारे चरणों में।
Milta hai saacha such keval
पवन मंद सुगंध शीतल, हेम मन्दिर शोभितम् - श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्
Pawan mandh sugandh sheetal
अधरं मधुरं वदनं मधुरं - मधुराष्टकम
Adharam Madhuram vadanam madhuram
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं
Achyutum kesavam Krishn daamodaram
सतगुरु मैं तेरी पतंग, सतगुरु मैं तेरी पतंग,
Satguru mein teri patang
गुरु मेरी पूजा गुरु गोबिंद।
Guru meri pooja, guru govinda
अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में
Ab saaump diya ish jeewan kaa
नाम जपन क्यों छोड़ दिया
Naam japan kyo
जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को
Jaise suraj ki garmi se jalte
माटी कहे कुम्हार से
Maati kahe kumhar se
क्षमा करो तुम मेरे प्रभुजी
Shama karo tum mere prabhuji
ओ पालनहारे, निर्गुण और न्यारे
O palanhaare, nirgun o nyaare
तुम मेरी राखो लाज हरि
Tum meri raakho laaj hari
राम तुम बड़े दयालु हो
Ram tum bade Dayalu ho
लाडली अद्बुत नज़ारा, तेरे बरसाने में है
Laadli Adbhut Nazaraa tere barsane mein hai


आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

गले में बैजंती माला, बजावे मुरली मधुर लाला,
श्रवण में कुंडल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला ।

गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली ।
लतन में ठाढ़े बनमाली, भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक,
चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की ।
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ।

आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ।

कनकमय मोर मुकुट बिलसे, देवता दर्शन को तरसे,
गगन सों सुमन राशि बरसे, बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग, अतुल रति गोप कुमारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ।

आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ।

जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारनि श्री गंगा,
स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव शीश, जटा के बीच,
हरै अघ कीच, चरन छवि श्री बनवारी की ।
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ।

आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ।

चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू,
चहुं दिशी गोपि ग्वाल धेनू, हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद,
कटत भव फंद, टेर सुन दीन भिखारी की ।
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ।

आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ।
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ।



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बृज के नंदलाला, राधाजी के सांवरिया,
सब दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया
बृज के नंदलाला, राधाजी के सांवरिया
सब दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया

मीरा पुकारी जब, गिरिधर गोपाला
मिल गया विष मे, अमृत का प्याला।
मिटाए कौन उसे, जिसे तूने राखे पिया
सब दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया।

नंदलाला, नंदलाला, नंदलाला, नंदलाला ।

बृज के नंदलाला, राधाजी के सांवरिया,
सब दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया।

जब तेरी गोकुल में, आया दुख भारी
एक इशारे से, सब विपदा टारी।
झुक गया इंद्र जब, गोवेर्धन धार लिया
सब दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया

बृज के नंदलाला, राधाजी के सांवरिया
सब दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया

नैनो में श्याम बसे, मन में बनवारी
सुध बिसराये गई, मुरली की धुन प्यारी।
मेरे मन मंदिर में, रास रचाओ रसिया
सब दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया।

बृज के नंदलाला, राधाजी के सांवरिया
सब दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया

देख रहे हो तुम, मेरे दुखड़े सारे
कब दर्शन दोगे, अँखियो के तारे
अधरों पे मुरली, काँधे पे कावरिया
सब दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया।

बृज के नंदलाला, राधाजी के सांवरिया
सब दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया

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सांवरिया, मीठी मीठी बाजे, मधुर तेरी बाँसुरिया
सांवरिया, मीठी मीठी बाजे, मधुर तेरी बाँसुरिया
प्यारो लागे वृंदावन धाम, जहां हे मेरो बांके बिहारी
सांवरिया, मीठी मीठी बाजे, मधुर तेरी बाँसुरिया

तेरी मुरलिया मीठा मीठा बोले,
भेद जीवन के सारे ये खोले
इसमें छुपा है गीता का ज्ञान,
इसमें छुपा है सृष्टि का भान ।

सांवरिया, मीठी मीठी बाजे, मधुर तेरी बाँसुरिया
प्यारो लागे वृंदावन धाम, जहां हे मेरो बांके बिहारी।

सांवरिया, मीठी मीठी बाजे, मधुर तेरी बाँसुरिया

राधा के संग रास रचाये,
यमुना तट पे गैयाँ चराये ।
कर में मुरली कंवर कारी,
झांकी झरोखे में बांके बिहारी

सांवरिया, मीठी मीठी बाजे, मधुर तेरी बाँसुरिया
प्यारो लागे वृंदावन धाम, जहां हे मेरो बांके बिहारी

सांवरिया, मीठी मीठी बाजे, मधुर तेरी बाँसुरिया

नख ऊपर गोवर्धन धारयो,
इंद्र को मान भंग कर डारयो,
ब्रज वासिनः को कष्ट निवारयो,
लीलाधारी है मुरली वारो

सांवरिया, मीठी मीठी बाजे, मधुर तेरी बाँसुरिया
प्यारो लागे वृंदावन धाम, जहां हे मेरो बांके बिहारी
सांवरिया, मीठी मीठी बाजे, मधुर तेरी बाँसुरिया

 
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भूलो मत प्यारे, बिहारीजी का नाम,
भूलो मत प्यारे, बिहारीजी का नाम,
मेरे बांके बिहारी है सब सुख धाम,
ओ, मेरे बांके बिहारी है सब सुख धाम,
ओ, मेरे बांके बिहारी है सब सुख धाम ।
मेरे बांके बिहारी है सब सुख धाम ।
भूलो मत प्यारे, बिहारीजी का नाम,
मेरे बांके बिहारी है सब सुख धाम ।
बांके बिहारी की झांकी सुहानी,
महिमा महाँ जिनकी जावे ना बखानी ।
बांके बिहारी की झाकी सुहानी,
महिमा महाँ जिनकी जावे ना बखानी ।
करते है सुर मुनि सब, इनको प्रणाम ।
मेरे बांके बिहारी है सब सुख धाम,
मेरे बांके बिहारी है सब सुख धाम,
मेरे बांके बिहारी है सब सुख धाम ।
भूलो मत प्यारे, बिहारीजी का नाम,
मेरे बांके बिहारी है सब सुख धाम ,
मेरे बांके बिहारी है सब सुख धाम,
मेरे बांके बिहारी है सब सुख धाम ।
भूलो मत प्यारे बिहारी जी का नाम
मेरे बांके बिहारी है सब सुख धाम ।
मंदिर में रहती है भीड़ बड़ी भरी,
दर्शन को आते है लाखो नर नारी ।
मंदिर में रहती है भीड़ बड़ी भरी,
दर्शन को आते है लाखो नर नारी ।
सेवक है इनकी ये दुनिया तमाम,
मेरे बांके बिहारी है सब सुख धाम ।
ओ, मेरे बांके बिहारी है सब सुख धाम,
मेरे बांके बिहारी है सब सुख धाम ।

भूलो मत प्यारे बिहारी जी का नाम,
मेरे बांके बिहारी है सब सुख धाम ।
ओ, मेरे बांके बिहारी है सब सुख धाम,
मेरे बांके बिहारी है सब सुख धाम ।
बांके ठाकुर की बांकी ठकुरानी,
मुक्ति भी भरती है, आकर के पानी ।
बांके ठाकुर की बांकी ठकुरानी,
मुक्ति भी भरती है, आकर के पानी ।
द्वारे पे खड़े है, देखो इनके चारो धाम,
द्वारे पे खड़े है, देखो इनके चारो धाम,
मेरे बांके बिहारी है सब सुख धाम ।
ओ, मेरे बांके बिहारी है सब सुख धाम ।
भूलो मत प्यारे बिहारी जी का नाम,
मेरे बांके बिहारी है सब सुख धाम ।
ओ, मेरे बांके बिहारी है सब सुख धाम,
मेरे बांके बिहारी है सब सुख धाम ।

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मुझे दे दो भजन वाली वो माला,
हरि दे दो भजन वाली वो माला ।

वो माला, वो माला, वो माला, वो माला ।
जो माला माता द्रोपदी ने फेरी,
देखो चीर बढ़ा गए नंदलाला,
देखो चीर बढ़ा गए नंदलाला ।

प्रभु दे दो भजन वाली वो माला ।
हरि दे दो भजन वाली वो माला ।

वो माला, वो माला, वो माला, वो माला ।
जो माला माता शबरी ने फेरी। (4)
झूठे बेरो को खा गए राम लाला,
झूठे बेरो को खा गए राम लाला ।
प्रभु दे दो भजन वाली वो माला,
हरि दे दो भजन वाली वो माला ।

मुझे दे दो भजन वाली वो माला,
हरि दे दो भजन वाली वो माला ।

वो माला, वो माला, वो माला, वो माला ।
जो माला हनुमान जी न फेरी। (4)
देखो लंका को पल में जला डाला,
देखो लंका को पल में जला डाला ।
प्रभु दे दो भजन वाली वो माला,

हरि दे दो भजन वाली वो माला ।

वो माला, वो माला, वो माला, वो माला ।
जो माला बाई मीरा ने फेरी। (4)
देखो हृदय में बस गए गोपाला ।
प्रभु दे दो भजन वाली वो माला,

हरि दे दो भजन वाली वो माला ।
मुझे दे दो भजन वाली वो माला,
हरि दे दो भजन वाली वो माला॥

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राम नाम के हीरे मोती, मैं बिखराऊँ गली गली,
कृष्ण नाम के हीरे मोती, मैं बिखराऊँ गली गली
ले लो रे कोई राम का प्याला, शोर मचाऊँ गली गली । (2)

बोलो राम राम राम राम राम, बोलो राम राम राम राम राम । (2)

माया के दीवानों सुन लो, एक दिन ऐसा आएगा,
धन दौलत और माल खजाना, यही पड़ा रह जायेगा ।
सुन्दर काया मिट्टी होगी, चर्चा होगी गली गली
ले लो रे कोई राम का प्याला, शोर मचाऊँ गली गली । (2)

राम नाम के हीरे मोती, मैं बिखराऊँ गली गली,
कृष्ण नाम के हीरे मोती, मैं बिखराऊँ गली गली,
ले लो रे कोई राम का प्याला, शोर मचाऊँ गली गली । (2)

क्यों करता तू मेरा मेरी, यह तो तेरा मुकाम नहीं,
झूठे जग में फंसा हुआ है, वह सच्चा इंसान नहीं ।
जग का मेला दो दिन का है, अंत में होगी चला चली,

ले लो रे कोई राम का प्याला, शोर मचाऊँ गली गली । (2)

राम नाम के हीरे मोती, मैं बिखराऊँ गली गली….

जिन जिन ने यह मोती लुटे, वह तो मालामाल हुए,
धन दौलत के बने पुजारी, आखिर वह कंगाल हुए ।
चांदी सोने वालो सुन लो, बात सुनाऊँ खरी खरी,
ले लो रे कोई राम का प्याला, शोर मचाऊँ गली गली । (2)

राम नाम के हीरे मोती, मैं बिखराऊँ गली गली…..

दुनिया को तू कब तक पगले, अपनी कहलायेगा,
ईश्वर को तू भूल गया है, अंत समय पछतायेगा ।
दो दिन का यह चमन खिला है, फिर मुरझाये कली कली,
ले लो रे कोई राम का प्याला, शोर मचाऊँ गली गली । (2)

राम नाम के हीरे मोती, मैं बिखराऊँ गली गली,
कृष्ण नाम के हीरे मोती, मैं बिखराऊँ गली गली,

बोलो राम राम राम, बोलो राम राम राम ।
बोलो राम राम राम, बोलो राम राम राम ।
बोलो राम राम राम, बोलो राम राम राम ।

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ऐसो चटक मटक सो ठाकुर, तीनों लोकन हूँ में नाय,
ऐसो चटक मटक सो ठाकुर, तीनों लोकन हूँ में नाय
तीनों लोकन हूँ में नाय, तीनों लोकन हूँ में नाय
ऐसो चटक मटक सो ठाकुर, तीनों लोकन हूँ में नाय ।

तीन ठौर ते टेढ़ो दिखे,
नट किसी चलगत यह सीखे,
टेड़े नैन चलावे तीखे,
सब देवन को देव, सब देवन को देव
तऊ ये ब्रज में घेरे गाय ।
ऐसो चटक मटक सो ठाकुर, तीनों लोकन हूँ में नाय ।

ब्रह्मा मोह कियो पछतायो,
दर्शन को शिव ब्रज में आयो,
मान इंद्र को दूर भगायो,
ऐसो वैभव वारो, ऐसो वैभव वारो,
तऊ ये ब्रज में गारी खाए ।

ऐसो चटक मटक सो ठाकुर, तीनों लोकन हूँ में नाय ।
बड़े बड़े असूरन को मारयो,
नाग कालिया पकड़ पछाड़ो,
सात दिना तक गिरिवर धारयो,
ऐसो बलि तऊ, ऐसो बलि तऊ,
खेलत में ग्वालन पे पीट जाय ।

ऐसो चटक मटक सो ठाकुर, तीनों लोकन हूँ में नाय ।

रूप छबीलो है ब्रज सुंदर,
बिना बुलाए डोले घर घर,
प्रेमी ब्रज गोपीन को चाकर
ऐसो प्रेम बढ्यो, ऐसो प्रेम बढ्यो,
माखन की चोरी करवे जाए ।

ऐसो ऐसो चटक मटक सो ठाकुर, तीनों लोकन हूँ में नाय,
ऐसो ऐसो चटक मटक सो ठाकुर, तीनों लोकन हूँ में नाय ।

तीनों लोकन हूँ में नाय, तीनों लोकन हूँ में नाय,
हो सखी, ऐसो चटक मटक सो ठाकुर, तीनों लोकन हूँ में नाय ।
ऐसो चटक मटक सो ठाकुर, तीनों लोकन हूँ में नाय (2) ।

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छोटी छोटी गैया, छोटे छोटे ग्वाल
छोटी छोटी गैया, छोटे छोटे ग्वाल
छोटो सो मेरो मदन गोपाल, छोटो सो मेरो मदन गोपाल ।

छोटी छोटी गैया, छोटे छोटे ग्वाल, छोटो सो मेरो मदन गोपाल ।
छोटी छोटी गैया, छोटे छोटे ग्वाल, छोटो सो मेरो मदन गोपाल ।

आगे आगे गैया, पीछे पीछे ग्वाल,
आगे आगे गैया, पीछे पीछे ग्वाल,
बीच में मेरो मदन गोपाल ।

छोटी छोटी गैया, छोटे छोटे ग्वाल, छोटो सो मेरो मदन गोपाल ।

कारी कारी गैया, गोरे गोरे ग्वाल,
कारी कारी गैया, गोरे गोरे ग्वाल,
श्याम वरण मेरो मदन गोपाल ।

छोटी छोटी गैया, छोटे छोटे ग्वाल, छोटो सो मेरो मदन गोपाल ।

घास खावे गैया, दूध पीवे ग्वाल,
घास खावे गैया, दूध पीवे ग्वाल,
माखन खावे मेरो मदन गोपाल ।

छोटी छोटी गैया, छोटे छोटे ग्वाल, छोटो सो मेरो मदन गोपाल ।

छोटी छोटी लकुटी, छोले छोटे हाथ,
छोटी छोटी लकुटी, छोले छोटे हाथ,
बंसी बजावे मेरो मदन गोपाल ।

छोटी छोटी गैया, छोटे छोटे ग्वाल, छोटो सो मेरो मदन गोपाल ।

छोटी छोटी सखियाँ, मधुबन बाग़,
छोटी छोटी सखियाँ, मधुबन बाग़,
रास रचावे मेरो मदन गोपाल ।

छोटी छोटी गैया, छोटे छोटे ग्वाल, छोटो सो मेरो मदन गोपाल ।
छोटी छोटी गैया, छोटे छोटे ग्वाल। छोटो सो मेरो मदन गोपाल॥
 
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बांके बिहारी मुझको देना सहारा
कही छूट जाये ना दामन तुम्हारा ।

तेरे सिवा दिल में समाये न कोई,
लगन का ये दीपक बुझाये ना कोई ।
तु ही मेरी कश्ती, तु ही है किनारा,
कही छूट जाये ना दामन तुम्हारा ।

बांके बिहारी मुझको देना सहारा,
कही छूट जाये ना दामन तुम्हारा ।

तेरे नाम का गान गाता रहूं मै,
सुबह शाम तुझको रिझाता रहू मै ।
तेरा नाम है मुझको प्राणों से प्यारा,
कही छूट जाये न दामन तुम्हारा ।

बांके बिहारी मुझको देना सहारा,
कही छूट जाये न दामन तुम्हारा ।

तेरे रास्ते से हटाती है दुनिया,
इशारो से मुझको बुलाती है दुनिया ।
देखू न हरगिज़ मै दुनिया का इशारा,
कही छूट जाये न दामन तुम्हारा ।

बांके बिहारी मुझको देना सहारा,
कही छूट जाये ना दामन तुम्हारा ।

बड़ी भूल की जो, मै दुनिया में आया,
मूल भी ख़ोया और, ब्याज भी गवाया ।
दुनिया में मुझको, ना भेजना दुबारा,
कही छूट जाये न दामन तुम्हारा ।

बांके बिहारी मुझको देना सहारा,
कही छूट जाये ना दामन तुम्हारा ।
बांके बिहारी मुझको देना सहारा,

बांके बिहारी मुझको देना सहारा,
कही छूट जाये न दामन तुम्हारा ।

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मन्दिर मे रहते हो भगवन,
कभी बाहर भी आया जाया करो ।
मैं रोज़ तेरे दर आता हूँ,
कभी तुम भी मेरे घर आया करो ।

मन्दिर मे रहते हो भगवन ।

मै तेरे दर का जोगी हूँ,
हुआ तेरे बिना वियोगी हूँ ।
तेरी याद मे आसूं बहते हैं,
इतना ना मुझे तडपाया करो ।
मैं रोज़ तेरे दर आता हूँ
कभी तुम भी मेरे घर आया करो

मन्दिर मे रहते हो भगवन ।

आते क्यों मेरे नजदीक नहीं,
इतना तो सताना ठीक नहीं ।
मैं दिल से तुमको चाहता हूँ,
कभी तुम भी मुझे अपनाया करो ।
मैं रोज़ तेरे दर आता हूँ
कभी तुम भी मेरे घर आया करो

मन्दिर मे रहते हो भगवन ।

मैं दीन हूँ, दीनानाथ हो तुम,
सुख़ दुःख मे सब के साथ हो तुम ।
मिलने की चाह खामोश करें,
कभी तुम भी मिला-मिलाया करो ।

मैं रोज़ तेरे दर आता हूँ,
कभी तुम भी मेरे घर आया करो ।
मन्दिर मे रहते हो भगवन ।
मन्दिर मे रहते हो भगवन ।

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मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले।
मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥

मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले।
भक्तो की तुमने कान्हा, विपदा है टारी।
मेरी भी बाह थामो, आ के बिहारी।
विघ्न बनाये तुमने, कर पार मुरली वाले॥

मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले।
मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥

पतझड़ है मेरा जीवन, बन के बहार आजा।
सुन ले पुकार कान्हा, बस एक बार आजा।
बैचैन मन के तुम ही, आराम मुरली वाले॥

मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले।
मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥

तुम हो दया के सागर, जनमों की मैं हूँ प्यासी।
दे दो जगह मुझे भी, चरणों में बस ज़रा सी।
सुबह तुम ही हो, तुम ही, मेरी शाम मुरली वाले॥

मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले।
मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥

मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले।
मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥
मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले

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छीन लिया मेरा भोला सा मन,
राधा रमण, प्यारो राधा रमण ।
छीन लिया मेरा भोला सा मन,
राधा रमण, प्यारो राधा रमण ।

गोकुल का ग्वाला, ब्रज का बसैया,
सखियों का मोहन, माँ का कन्हैया ।
भक्तो का जीवन, निर्धन का धन,
राधा रमण, प्यारो राधा रमण ।

छीन लिया मेरा भोला सा मन,
राधा रमण, प्यारो राधा रमण ।

यमुना के जल में वही श्याम खेले,
लहरों में उछले और मारे धनेरे ।
बिछुङन कभी होवे मोहन मिलन,
राधा रमण, प्यारो राधा रमण ।

छीन लिया मेरा भोला सा मन,
राधा रमण प्यारो राधा रमण ।

जा कर के देखा मंदिर के अंदर,
बैठा वाही बाबा वो श्याम सुन्दर ।
कुंडल वरन और तिरछी चलन,
राधा रमण, प्यारो राधा रमण ।

छीन लिया मेरा भोला सा मन,
राधा रमण, प्यारो राधा रमण,
राधा रमण, प्यारो राधा रमण,
राधा रमण, प्यारो राधा रमण ।

छीन लिया मेरा भोला सा मन,
राधा रमण, प्यारो राधा रमण ।
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कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला,
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला
जय गोविंदा जय गोपाला, जय गोविंदा जय गोपाला

राधाने श्याम कहा, मीरा ने गिरधर,
कृष्णा ने कृष्ण कहा, कुब्जा ने नटवर
ग्वालो ने पुकारा कह कर के गोपाला,
मैं तौ कहुँ साँवरिया बाँसुरिया वाला (2)

जय गोविंदा जय गोपाला, जय गोविंदा जय गोपाला

कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला,
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला
मैया तो कहती थी तुमको कन्हैया,
मैया तो कहती थी तुमको कन्हैया,

घनश्याम कहते थे बलराम भैया,
घनश्याम कहते थे बलराम भैया,
सुरा की आँखों कें तुम थे उजाला
मैं तो कहुँ साँवरिया बाँसुरिया वाला

कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला,
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला

भीष्म के बनवारी, अर्जुन के मोहन,
छलिया जो कहकर बुलाया दुर्योधन
कन्सा तो कहता था जलकर के काला,
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला

अच्युत युदिष्ठर के, उद्धव के माधव,
भक्तों के भगवान, संतो के केशव।
मानव सब भजते है कह कर कृपाला,
मैं तौ कहुँ साँवरिया बाँसुरिया वाला

कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला,
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला

जय गोविंदा जय गोपाला, जय गोविंदा जय गोपाला (2)
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मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है,
तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया ।
तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया ।

ना मिलती अगर दी हुई दात तेरी,
तो क्या थी ज़माने में औकात मेरी ।
तुम्ही ने तो जीने के काबिल किया है,

तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया ।
तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया ।

मुझे है सहारा तेरी बंदगी का,
है जिसपर गुज़ारा मेरी ज़िन्दगी का ।
मिला मुझ को जो कुछ तुम्ही से मिला है ।

तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया ।
तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया ।

किया कुछ ना मैंने, शरमसार हूँ मैं,
तेरी रहमतो का तलबगार हूँ मैं ।
दिया कुछ नहीं, बस लिया ही लिया है ।

तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया ।
तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया ।

मिला मुझको जो कुछ बदौलत तुम्हारी,
मेरा कुछ नहीं सब है दौलत तुम्हारी ।
उसे क्या कमी जो तेरा हो लिया है ।

तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया ।
तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया ।

मेरी ही नहीं, तू सभी का है दाता,
तु ही सब को देता, तु ही है खिलाता ।

तेरा ही दिया मैंने खाया पीया है ।
तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया ।

तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया ।

मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है ।
मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है ।

तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया ।
तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया ।
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अपनी वाणी में अमृत घोल,
अपनी वाणी में अमृत घोल,
ओ रसना राधे राधे बोल ।

ये बोल बड़े अनमोल,
ओ रसना राधे राधे बोल ।

राधाजी बरसाने वाली, राधाजी वृषभानु दुलारी ।
राधाजी बरसाने वाली, राधाजी वृषभानु दुलारी ।
दो अक्षर आधार जगत के, दो अक्षर आधार जगत के,
ये अक्षर अनमोल ।
ओ रसना राधे राधे बोल, रसना राधे राधे बोल ।

अपनी वाणी में अमृत घोल,
अपनी वाणी में अमृत घोल,
ओ रसना राधे राधे बोल, रसना राधे राधे बोल ।

राधाजी महारास रचावे, राधाजी नन्दलाल नचावे ।
राधाजी महारास रचावे, राधाजी नन्दलाल नचावे ।
इस छवि को भर कर नयनन में, इस छवि को भर कर नयनन में,
अन्तर के पट खोल ।
ओ रसना राधे राधे बोल, रसना राधे राधे बोल ।

अपनी वाणी में अमृत घोल, अपनी वाणी में अमृत घोल ।
ओ रसना राधे राधे बोल, रसना राधे राधे बोल ।

बिन राधा नहीं सजे बिहारी, बिन राधा नहीं मिले बनवारी ।
बिन राधा नहीं सजे बिहारी, बिन राधा नहीं मिले बनवारी ।
इनके चरण पकड़ ले नादां, इनके चरण पकड़ ले नादान,
भटक न दर दर डोल ।
ओ रसना राधे राधे बोल, रसना राधे राधे बोल ।

अपनी वाणी में अमृत घोल, अपनी वाणी में अमृत घोल ।
ओ रसना राधे राधे बोल, रसना राधे राधे बोल ।
रसना राधे राधे बोल ।

राधे बोल, राधे बोल, राधे, राधे, राधे, राधे ।
ये बोल बड़े अनमोल, ओ रसना राधे राधे बोल ।
रसना राधे राधे बोल, रसना राधे राधे बोल

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करदो करदो बेडा पार, राधे अलबेली सरकार,
करदो करदो बेडा पार, राधे अलबेली सरकार।
राधे अलबेली सरकार, राधे अलबेली सरकार,
करदो करदो बेडा पार,राधे अलबेली सरकार ।

बार बार श्री राधे हमको, वृन्दावन में बुलाना,
आप भी दर्शन देना, बिहारी जी से भी मिलवाना,
यही है विनती बारम्बार, राधे अलबेली सरकार ।

ओ, राधे अलबेली सरकार, करदो करदो बेडा पार,
राधे अलबेली सरकार

तेरी कृपा से राधा रानी, बनते हैं सब काम,
छोड़ के सारी दुनियादारी, आगए तेरे धाम,
सुन लो मेरी करुण पुकार, राधे अलबेली सरकार ।

ओ, राधे अलबेली सरकार, करदो करदो बेडा पार,
राधे अलबेली सरकार ।

तेरी कृपा बिना श्री राधे, कोई ना ब्रिज में आये,
तेरी कृपा जो हो जाए तो, भवसागर तर जाए,
तेरी महिमा अपरम्पार, राधे अलबेली सरकार ।

ओ, राधे अलबेली सरकार करदो करदो बेडा पार,
राधे अलबेली सरकार ।

वृन्दावन की गली गली में, धूम मची हैं भारी,
श्री राधे राधे बोल बोल के, झूम रहे नर नारी,
तेरी होवे जय जयकार, राधे अलबेली सरकार ।

ओ, राधे अलबेली सरकार, करदो करदो बेडा पार,
राधे अलबेली सरकार, राधे अलबेली सरकार,
करदो करदो बेडा पार, राधे अलबेली सरकार,,

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किशोरी इतना तो कीजो, लाड़ली इतना तो कीजो,
जग जंजाल छुड़ाए वास बरसाने को दीजो ।

भोर होत महलन में थारे सेवा में निस जाऊं,
मंगला के नित्त दर्शन पाऊं, जीवन सफल बनाऊं ।
किशोरी मोहे सेवा में लीजो, लाड़ली सेवा में लीजो,
जग जंजाल छुड़ाए वास बरसाने को दीजो ॥

किशोरी इतना तो कीजो, लाड़ली इतना तो कीजो,
जग जंजाल छुड़ाए वास बरसाने को दीजो ।

पड़ी रहूँ मैं द्वार तिहारे, रसिकन दर्शन पाऊं,
भगतन की पद धूलि मिले तो अपने सीस चढाउँ ।
किशोरी मोहे द्वारे रख लीजो, लाड़ली द्वारे रख लीजो,
जग जंजाल छुड़ाए वास बरसाने को दीजो ॥

किशोरी इतना तो कीजो, लाड़ली इतना तो कीजो,
जग जंजाल छुड़ाए वास बरसाने को दीजो ।

भूख लगे तो ब्रजवासिन के टूक मांग के खाऊं,
कभू प्रसादी श्री महलन की कृपा होए तो पाऊं ।
किशोरी मेरी विनय मान लीजो, लाडली विनय मान लीजो,
जग जंजाल छुड़ाए वास बरसाने को दीजो ॥

किशोरी इतना तो कीजो, लाड़ली इतना तो कीजो,
जग जंजाल छुड़ाए वास बरसाने को दीजो ।

राधे राधे रटूं निरंतर तेरे ही गुण गाऊं,
तेरे ही गुण गाय गाय मैं तेरी ही होय जाऊं ।

किशोरी मोहे अपनी कर लीजो, लाड़ली अपनी कर लीजो,
जग जंजाल छुड़ाए वास बरसाने को दीजो ॥
किशोरी इतना तो कीजो, लाड़ली इतना तो कीजो,
जग जंजाल छुड़ाए वास बरसाने को दीजो ।

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श्यामा तेरे चरणों की, राधे तेरे चरणों की,
गर धूल जो मिल जाए।
सच कहता हूँ मेरी,
तकदीर बदल जाए॥

श्यामा तेरे चरणों की, राधे तेरे चरणों की
सुनता हूँ तेरी रहमत, दिन रात बरसती है।
एक बूँद जो मिल जाए, दिल की कली खिल जाए॥
श्यामा तेरे चरणों की, राधे तेरे चरणों की

श्यामा तेरे चरणों की, राधे तेरे चरणों की,
गर धूल जो मिल जाए।
सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए॥

यह मन बड़ा चंचल है, कैसे तेरा भजन करूँ।
जितना इसे समझाऊं, उतना ही मचल जाए॥
श्यामा तेरे चरणों की, राधे तेरे चरणों की

श्यामा तेरे चरणों की, राधे तेरे चरणों की,
गर धूल जो मिल जाए।
सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए॥


नजरों से गिराना ना, चाहे जितनी सजा देना।
नजरों से जो गिर जाए, मुश्किल ही संभल पाए॥
श्यामा तेरे चरणों की, राधे तेरे चरणों की

श्यामा तेरे चरणों की, राधे तेरे चरणों की,
गर धूल जो मिल जाए।
सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए॥


श्यामा इस जीवन की बस एक तमन्ना है।
तुम सामने हो मेरे और प्राण निकल जाए॥
श्यामा तेरे चरणों की, राधे तेरे चरणों की
गर धूल जो मिल जाए।

श्यामा तेरे चरणों की, राधे तेरे चरणों की
श्यामा तेरे चरणों की, राधे तेरे चरणों की
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ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन।

है आँख वो
जो श्याम का दर्शन किया करे।
है शीश जो प्रभु चरण में
वंदन किया करे।
बेकार वो मुख है
जो रहे व्यर्थ बातों में।
मुख वो है जो हरि नाम का
सुमिरन किया करे॥
हीरे मोती से नहीं
शोभा है हाथ की।
है हाथ जो भगवान् का
पूजन किया करे॥
मर के भी अमर नाम है
उस जीव का जग में।
प्रभु प्रेम में बलिदान जो
जीवन किया करे॥
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन।
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन।
वो तो गली गली, हरि गुण गाने लगी॥
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन।
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन।
वो तो गली गली हरि गुण गाने लगी॥
महलों में पली, बन के जोगन चली।
महलों में पली, बन के जोगन चली।
मीरा रानी दीवानी कहाने लगी॥
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन।
वो तो गली गली गली गली,
हरि गुण गाने लगी॥
ऐसी लागी लगन

कोई रोके नहीं, कोई टोके नहीं,
मीरा गोविन्द गोपाल गाने लगी।
कोई रोके नहीं, कोई टोके नहीं,
मीरा गोविन्द गोपाल गाने लगी।
बैठी संतो के संग, रंगी मोहन के रंग,
मीरा प्रेमी प्रीतम को मनाने लगी।
वो तो गली गली हरि गुण गाने लगी॥
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन।
वो तो गली गली हरि गुण गाने लगी॥
महलों में पली, बन के जोगन चली।
मीरा रानी दीवानी कहाने लगी॥
ऐसी लागी लगन
राणा ने विष दिया, मानो अमृत पिया,
मीरा सागर में सरिता समाने लगी।
राणा ने विष दिया, मानो अमृत पिया,
मीरा सागर में सरिता समाने लगी।
दुःख लाखों सहे, मुख से गोविन्द कहे,
मीरा गोविन्द गोपाल गाने लगी।
वो तो गली गली हरि गुण गाने लगी॥
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन।
वो तो गली गली हरि गुण गाने लगी॥
महलों में पली, बन के जोगन चली।
मीरा रानी दीवानी कहाने लगी॥
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन।
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन।
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भये प्रगट कृपाला, दीनदयाला, कौशल्या हितकारी।
हर्षित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप विचारी ॥ १ ॥

लोचन अभिरामा, तनु घनश्यामा, निज आयुध भुज चारी।
भूषण गल माला, नयन विशाल, शोभासिंधू खरारी ॥ २ ॥

कह दुई कर जोरी, अस्तुति तोरी, कही बिधि करू अनंता।
माया गुण ज्ञानातीत अमाना, वेद पुरान भनंता ॥ ३ ॥

करुना सुखसागर, सुब गुण आगर, जेहि गावाहिं श्रुति संता।
सो मम हित लागी, जन अनुरागी, भयौ प्रगट श्रीकंता ॥ ४ ॥

ब्रमांड निकाय, निर्मित माया, रोम रोम प्रति वेद कहे।
मुम उर सो बासी, यह उपहासी, सुनत धीर मति थिर न रहे ॥ ५ ॥

उपजा जब गयाना, प्रभु मुस्काना, चरित बहुत बिधि कीन्ह चहे।
कही कथा सुहाई, मातु बुझाई, जेहि प्रकार सूत प्रेम लाहे ॥ ६ ॥

माता पुनि बोली, सो मति डोली, तजहु तात यह रूपा।
कीजै शिशु लीला, अति प्रियशीला, यह सुख परम अनूपा ॥ ७ ॥

सुनी वचन सुजाना, रोदन ठाना, होई बालक सुरभूपा।
यह चरित जे गावही, हरिपद पावही, तेहिं ना परहिं भवकूपा ॥ ८ ॥

दोहा:-
विप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार |
निज इच्चा निर्मित तनु माया गुण गोपार ||

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श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
नवकंज-लोचन कंज-मुख, कर-कंज पद-कंजारुणम्॥

कंदर्प अगणित अमित छबि, नव नील नीरज सुन्दरम्।
पटपीत मानहुं तड़ित रूचि-शुची, नौमि जनक सुतावरम्॥

भजु दीन बन्धु दिनेश, दानव दैत्यवंश निकन्दनम्।
रघुनन्द आनंदकंद कोशल चन्द, दशरथ नन्दनम्॥

सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु, उदारु अङ्ग विभूषणम्।
आजानुभुज शर चापधर, सङ्ग्राम-जित-खर दूषणम्॥

इति वदति तुलसीदास, शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम हृदयकंज निवास कुरु, कामादि खलदल गंजनम्॥

मनु जाहीं राचेउ मिलिहि सो बरु, सहज सुन्दर साँवरो।
करुना निधान सुजान सीलु, सनेहु जानत रावरो॥

एही भांति गोरी असीस सुनी, सिय सहित हिय हरषीं अली।
तुलसी भावानिह पूजी पुनि-पुनि, मुदित मन मंदिर चली॥
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राम चरण सुखदाई, राम चरण सुखदाई
भजमन राम चरण सुखदाई, राम चरण सुखदाई

जिहि चरननसे निकसी सुरसरि, शंकर जटा समाई।
जटासंकरी नाम परयो है, त्रिभुवन तारन आई॥

भजमन राम चरण सुखदाई
भजमन राम चरण सुखदाई

जिन चरननकी चरनपादूका, भरत रह्यो लिव लाई।
सोइ चरन केवट धोइ लीने, तब हरि नाव चलाई॥

भज मन राम चरण सुखदाई, भज मन राम चरण सुखदाई

सोइ चरन संतजन सेवत, सदा रहत सुखदाई।
सोइ चरन माँ अहिल्या, परसि परमपद पाई॥

भज मन राम चरण सुखदाई, भज मन राम चरण सुखदाई

दंडकबन प्रभु पावन कीन्हो, ऋषियन त्रास मिटाई।
सोई प्रभु त्रिलोकके स्वामी, कनक मृगा सँग धाई॥

भज मन राम चरण सुखदाई, भज मन राम चरण सुखदाई

कपि सुग्रीव बंधु भय-ब्याकुल, तिन जय छत्र फिराई।
रिपु को अनुज बिभीषन निसिचर, परसत लंका पाई॥

भज मन राम चरण सुखदाई, भज मन राम चरण सुखदाई

सिव सनकादिक अरु ब्रह्मादिक, सेष सहस मुख गाई ।
तुलसीदास मारुत-सुतकी प्रभु, निज मुख करत बढाई॥

भज मन राम चरण सुखदाई, भज मन राम चरण सुखदाई

राम चरण सुखदाई, राम चरण सुखदाई
भजमन राम चरण सुखदाई, राम चरण सुखदाई
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भरत भाई, कपि से उरिन हम नाहीं,
कपि से उरिन हम नाहीं,
भरत भाई, कपि से उरिन हम नाहीं

सौ योजन, मर्याद समुद्र की,
ये कूदी गयो छन माहीं
लंका जारी, सिया सुधि लायो,
पर गर्व नहीं मन माहीं

कपि से उरिन हम नाहीं,
भरत भाई, कपि से उरिन हम नाहीं

शक्तिबाण, लग्यो लछमन के,
हाहाकार भयो दल माहीं
धौलागिरी, कर धर ले आयो,
भोर ना होने पाई

कपि से उरिन हम नाहीं,
भरत भाई, कपि से उरिन हम नाहीं

अहिरावन की भुजा उखारी,
पैठी गयो मठ माहीं
जो भैया, हनुमत नहीं होते,
मोहे, उलहतो जग माहीं

कपि से उरिन हम नाहीं,
भरत भाई, कपि से उरिन हम नाहीं

आज्ञा भंग, कबहुं नहिं कीन्हीं, जहाँ पठायु तहाँ जाई,
तुलसीदास, पवनसुत महिमा,
प्रभु निज मुख करत बड़ाई

कपि से उरिन हम नाहीं,
भरत भाई, कपि से उरिन हम नाहीं

भरत भाई, कपि से उरिन हम नाहीं,
कपि से उरिन हम नाहीं,
भरत भाई, कपि से उरिन हम नाहीं
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प्रेम मुदित मन से कहो, राम राम राम
श्री राम राम राम, श्री राम राम राम,

श्री राम राम राम

पाप कटें दुःख मिटें, लेत राम नाम,
भव समुद्र सुखद नाव, एक राम नाम
श्री राम राम राम, श्री राम राम राम,

श्री राम राम राम, श्री राम राम राम

परम शांति सुख निधान, नित्य राम नाम,
निराधार को आधार, एक राम नाम

श्री राम राम राम, श्री राम राम राम,
श्री राम राम राम, श्री राम राम राम

परम गोप्य परम इष्ट, मंत्र राम नाम,
संत हृदय सदा बसत, एक राम नाम

श्री राम राम राम, श्री राम राम राम,
श्री राम राम राम, श्री राम राम राम

महादेव सतत जपत, दिव्य राम नाम,
कासी मरत मुक्ति करत, कहत राम नाम

श्री राम राम राम, श्री राम राम राम,
श्री राम राम राम, श्री राम राम राम

मात पिता बंधु सखा, सब ही राम नाम,
भक्त जनन जीवन धन, एक राम नाम

श्री राम राम राम, श्री राम राम राम,
श्री राम राम राम, श्री राम राम राम

प्रेम मुदित मन से कहो, राम राम राम,
श्री राम राम राम, श्री राम राम राम,
श्री राम राम राम

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रघुवर तुमको मेरी लाज ।
रघुवर तुमको मेरी लाज ।
सदा सदा मैं शरण तिहारी,
तुम ही गरीब निवाज़ ॥

रघुवर तुमको मेरी लाज ।
रघुवर तुमको मेरी लाज ।

पतित उद्धारण विरद तिहारो,
शरावानन सुनी आवाज ।
रघुवर तुमको मेरी लाज ।
सदा सदा मैं शरण तिहारी,
तुम ही गरीब निवाज़ ॥

रघुवर तुमको मेरी लाज ।
रघुवर तुमको मेरी लाज ।

अब तो पतित पुरातन करिये,
पार उतारो जहाज ॥
रघुवर तुमको मेरी लाज ।

सदा सदा मैं शरण तिहारी,
तुम ही गरीब निवाज़ ॥

रघुवर तुमको मेरी लाज ।
रघुवर तुमको मेरी लाज ।

अघ खंडन, दुःख भन्जन जन के,
यही तिहारो काज ।

रघुवर तुमको मेरी लाज ।
रघुवर तुमको मेरी लाज ।

तुलसीदास पर कृपा कीजे,
भक्ति दान देहु आज,

रघुवर तुमको मेरी लाज ।
रघुवर तुमको मेरी लाज ।

सदा सदा मैं शरण तिहारी,
तुम ही गरीब निवाज़ ।

रघुवर तुमको मेरी लाज,
रघुवर तुमको मेरी लाज ।
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तन के तम्बूरे में,
तन तम्बूरा, तार मन,
अद्भुत है ये साज ।
हरी के कर से बज रहा,
हरी की है आवाज ।

तन के तम्बूरे में,
दो सांसो की तार बोले,
जय सिया राम, राम,

जय राधे श्याम, श्याम ।
जय सिया राम, राम,
जय राधे श्याम, श्याम ।

अब तो इस मन के मंदिर में, प्रभु का हुआ बसेरा,
मगन हुआ मन मेरा, छूटा जनम जनम का फेरा ।
मन की मुरलिया में,
सुर का सिंगार बोले ।
जय सिया राम राम
जय राधे श्याम, श्याम,

लगन लगी लीला धारी से, जगी रे जगमग ज्योति ।
राम नाम का हीरा पाया, श्याम नाम का मोती ।
प्यासी दो अंखियो में,
आंसुओ के धार बोले ।
जय सिया राम राम,
जय राधे श्याम श्याम ।

तन के तम्बूरे में,
दो सांसो की तार बोले,
जय सिया राम राम,
जय राधे श्याम श्याम ।
जय सिया राम राम,
जय राधे श्याम श्याम ।
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पार करो मेरा बेडा भवानी,
पार करो मेरा बेडा
छाया घोर अँधेरा भवानी,
पार करो मेरा बेडा

गहरी नदिया नाव पुराणी,
दया करो माँ आदि भवानी
सबको आसरा तेरा भवानी,
सबको आसरा तेरा
पार करो मेरा बेडा भवानी,
पार करो मेरा बेडा

मै निर्गुनिया, गुण नहीं कोई,
मैया जगा दो किस्मत सोई
देखियो ना गुण मेरा भवानी,
देखियो ना गुण मेरा

पार करो मेरा बेडा भवानी,
पार करो मेरा बेडा

जग जननी तेरी ज्योत जगाई,
एक दीदार की आस लगाई
हृदय करो बसेरा भवानी,
हृदय करो बसेरा
पार करो मेरा बेडा भवानी,
पार करो माँ बेडा

भक्तो को माँ ऐसा वर दो,
प्यार की एक नज़र माँ कर दो
लुटे पाप लुटेरा भवानी,
लुटे पाप लुटेरा

पार करो मेरा बेडा भवानी,
पार करो मेरा बेडा
पार करो मेरा बेडा भवानी,
पार करो मेरा बेडा

छाया घोर अँधेरा भवानी,
पार करो मेरा बेडा

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तू तो काली रे कल्याणी है माँ, ज्या ज्यो ऊँचा जोगमाया
तू तो काली रे कल्याणी मोरी माँ, ज्या ज्यो ऊँचा जोगमाया ।
तू तो भक्ता री रखवाली हे माँ, ज्या ज्यो ऊँचा जोगमाया । (2)

तू तो चारे युग में जानी हैं माँ, ज्या ज्यो ऊँचा जोगमाया

तू तो पहला ही युग में जानी हैं माँ,(2)
तू तो शंकर घर पटरानी है माँ ।
तू तो भस्मासुर हरणारी है माँ,
ज्या ज्यो ऊँचा जोगमाया

तू तो काली रे कल्याणी है माँ, ज्या ज्यो ऊँचा जोगमाया
तू तो दूसरा युग में जानी है माँ, (2)
तू तो हरिश्चंद्र घर पटरानी है माँ ।
तू तो सत्या करन ने जानी है माँ,
ज्या ज्यो ऊँचा जोगमाया ।

तू तो काली रे कल्याणी मोरी माँ, ज्या ज्यो ऊँचा जोगमाया ।

तू तो तीसरा युग में जानी है माँ, (2)
तू तो रामचंद्र घर पटरानी है माँ ।

हे माँ,….हे माँ,….हे माँ… माँ!

तू तो तीसरा युग में जानी है माँ, (2)
तू तो रामचंद्र घर पटरानी है माँ ।
तू तो रावण प्राण संहारी हे माँ, ज्या ज्यो ऊँचा जोगमाया

तू तो काली रे कल्याणी मोरी माँ, ज्या ज्यो ऊँचा जोगमाया

तू तो चौथा युग में जानी है माँ, (2)
तू तो पांडव घर पटरानी है माँ ।
हे माँ,…हे माँ,…हे माँ, माँ!.... हे माँ,…हे माँ,….हे माँ,…. माँ
तू तो चौथा युग में जानी है माँ, (2)
तू तो पांडव घर पटरानी है माँ ।
तू तो कौरव कुल संहारी हे माँ, तू ऊँची है जोगमाया

तू तो काली रे कल्याणी है माँ, ज्या ज्यो ऊँचा जोगमाया,
तू तो भक्ता री रखवाली हे माँ, ज्या ज्यो ऊँचा जोगमाया ।
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जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय।
भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय॥
तू ही सत्-चित्-सुखमय, शुद्ध ब्रह्मरूपा।
सत्य सनातन, सुन्दर, पर-शिव सुर-भूपा॥
जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय।
भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय॥
आदि अनादि, अनामय, अविचल, अविनाशी।
अमल, अनन्त, अगोचर, अज आनन्दराशी॥
जगजननी जय जय माँ,
अविकारी, अघहारी, अकल कलाधारी।
कर्ता विधि भर्ता हरि, हर संहारकारी॥
जगजननी जय जय माँ,
तू विधिवधू, रमा, तू उमा महामाया।
मूल प्रकृति, विद्या तू, तू जननी जाया॥
जगजननी जय जय माँ,
राम, कृष्ण, तू सीता, ब्रजरानी राधा।
तू वाँछा कल्पद्रुम, हारिणि सब बाधा॥
जगजननी जय जय माँ,
दश विद्या, नव दुर्गा, नाना शस्त्रकरा।
अष्टमातृका, योगिनि, नव-नव रूप धरा॥
जगजननी जय जय माँ,
तू परधाम निवासिनि, महाविलासिनि तू।
तू ही शमशान विहारिणि, ताण्डव लासिनि तू॥
जगजननी जय जय माँ,
सुर-मुनि मोहिनि सौम्या, तू शोभाधारा।
विवसन विकट सरुपा, प्रलयमयी धारा॥
जगजननी जय जय माँ
 
तू ही स्नेहसुधामयी, तू अति गरलमना।
रत्नविभूषित तू ही, तू ही अस्थि तना॥
जगजननी जय जय माँ,
मूलाधार निवासिनि, इहपर सिद्धिप्रदे।
कालातीता काली, कमला तू वर दे॥
जगजननी जय जय माँ,
शक्ति शक्तिधर तू ही, नित्य अभेदमयी।
भेद प्रदर्शिनि वाणी विमले वेदत्रयी॥
जगजननी जय जय माँ,
हम अति दीन दुखी माँ, विपट जाल घेरे।
हैं कपूत अति कपटी, पर बालक तेरे॥
जगजननी जय जय माँ,
निज स्वभाववश जननी, दयादृष्टि कीजै।
करुणा कर करुणामयी, चरण शरण दीजै॥
जगजननी जय जय माँ,
जगजननी जय जय।
भयहारिणी, भवतारिणी,
भवभामिनि जय जय॥
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जय शिव ओंकारा, ओम जय शिव ओंकारा,
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा
ॐ हर हर, हर हर महादेव
एकानन चतुरानन, पंचानन राजै, शिव पंचानन राजै,
हंसासन गरूड़ासन, वृषवाहन साजे
ॐ हर हर, हर हर महादेव

दोभुज चार चतुर्भुज, दशभुज अति सोहे,
स्वामी दशभुज अति सोहे। तीनो रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे
ॐ हर हर, हर हर महादेव

अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी, स्वामी मुण्डमाला धारी,
त्रिपुरारी कंसारी, कर माला धारी
ॐ हर हर, हर हर महादेव

श्वेतांबर पीतांबर, बाघंबर अंगे, स्वामी बाघंबर अंगे,
सनकादिक गरुडादिक, भूतादिक संगे
ॐ हर हर, हर हर महादेव

करमध्येन कमंडलु, चक्र त्रिशूलधारी, स्वामी चक्र त्रिशूलधारी,
सुखकर्ता दुखहर्ता, जग-पालन करता
ॐ हर हर, हर हर महादेव

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, जानत अविवेका, स्वामी जानत अविवेका,
प्रणवाक्षर ओम मध्ये, ये तीनों एका
ॐ हर हर, हर हर महादेव

त्रिगुण स्वामीजी की आरती, जो कोइ नर गावे, स्वामी जो कोइ नर गावे,
कहत शिवानन्द स्वामी, मन वांछित फल पावे
ॐ हर हर, हर हर महादेव
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शिव शंकर तेरी जटाओ से, बहती है गंग धारा,
है जोगी अगम अपारा, ऐसा जोगी अगम अपारा
है जोगी अगम अपारा, ऐसा जोगी अगम अपारा

है तन में भस्म रमाए, मस्तक पे चन्द्र सुहाए,
उठे ध्वनि सब्द ओंकारा, है जोगी अगम अपारा

है जोगी अगम अपारा, ऐसा जोगी अगम अपारा,
जोगी अगम अपारा, ऐसा जोगी अगम अपारा

शिव शंकर तेरी जटाओ से, बहती है गंग धारा,
है जोगी अगम अपारा, ऐसा जोगी अगम अपारा

तुम नीलकंठ कहलाये, तेरे अंग भुजंग सुहाए,
कर में त्रिशूल उजियारा, है जोगी अगम अपारा

शंकर तेरी जटाओ से, बहती है गंग धारा,
है जोगी अगम अपारा, ऐसा जोगी अगम अपारा

बाघम्बर आसन पाए, गोरी वामांग सुहाए,
डमरू ध्वनि होत अपारा, है जोगी अगम अपारा

शिव शंकर तेरी जटाओ से, बहती है गंग धारा,
है जोगी अगम अपारा, ऐसा जोगी अगम अपारा

सुर माहि-सुर नर-मुनि राइ, सब तेरे ध्यान लगाई,
विश्वम्बर अगम अपारा है जोगी अगम अपारा

है जोगी अगम अपारा, ऐसा जोगी अगम अपारा,
शिव शंकर तेरी जटाओ से बहती है गंग धारा,

है जोगी अगम अपारा, ऐसा जोगी अगम अपारा

ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय
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मिलता है सच्चा सुख केवल, शिवजी तुम्हारे चरणों में,
यह बिनती है पलछिन छिनकी, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में

चाहे बैरी सब संसार बने, चाहे जीवन मुझ पर भार बने
चाहे मौत गले का हार बने, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में

मिलता है सच्चा सुख केवल, शिवजी तुम्हारे चरणों में,
यह बिनती है पलछिन छिनकी, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में

चाहे अग्नि में मुझे जलना हो, चाहे काँटों पे मुझे चलना हो,
चाहे छोड़ के देश निकलना हो, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में

मिलता है सच्चा सुख केवल, शिवजी तुम्हारे चरणों में,
यह बिनती है पलछिन छिनकी, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में

चाहे संकट ने मुझे घेरा हो, चाहे चारो और अँधेरा हो,
पर मन नहीं डगमग मेरा हो, रहे ध्यान तुम्हारे चारणों में

मिलता है सच्चा सुख केवल, शिवजी तुम्हारे चरणों में,
यह बिनती है पलछिन छिनकी, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में

जिव्ह्या पर तेरा नाम रहे, तेरा ध्यान सुबह और श्याम रहे,
तेरी याद तो आंठो याम रहे, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में

मिलता है सच्चा सुख केवल, शिवजी तुम्हारे चरणों में,
यह बिनती है पलछिन छिनकी, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में

चाहे बैरी सब संसार बने, चाहे जीवन मुझ पर भार बने,
चाहे मौत गले का हार बने, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में

मिलता है सच्चा सुख केवल, शिवजी तुम्हारे चरणों में,
यह बिनती है पलछिन छिनकी, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में

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श्रीबद्रीनाथ स्तुति

पवन मंद सुगंध शीतल, हेम मन्दिर शोभितम्,
निकट गंगा बहत निर्मल, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम् ।

शेष सुमिरन, करत निशदिन, धरत ध्यान महेश्वरम्,
वेद ब्रह्मा करत स्तुति, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम् ।

इन्द्र चन्द्र कुबेर धुनि कर, धूप दीप निवेदितम्,
सिद्ध मुनिजन करत जय जय, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम् ।

शक्ति गौरी गणेश शारद, नारद मुनि उच्चारणम्,
योग ध्यान अपार लीला, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम् ।

श्रीलक्ष्मी माँ चंवर डोले, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्,
यक्ष किन्नर करत कौतुक, गान गंधर्व प्रकाशितम् ।

कैलाशमे एक देव निरंजन,शैल शिखर महेश्वरम,
राजा युधिष्टिर करत स्तुती, श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ।

श्री बद्रीनाथ पंच रत्न, पठन पाप विनाशनम्,

कोटि-तीर्थ सुपुण्य सुन्दर, सहज अति फलदायकम् ।
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मधुराष्टकम
अधरं मधुरं वदनं मधुरं, नयनं मधुरं हसितं मधुरम्।
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं, मधुराधिपते अखिलं मधुरम्॥

वचनं मधुरं चरितं मधुरं,
वसनं मधुरं वलितं मधुरम्।
चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं,
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः,
पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ।
नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं,
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

गीतं मधुरं पीतं मधुरं,
भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम्।
रूपं मधुरं तिलकं मधुरं,
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

करणं मधुरं तरणं मधुरं,
हरणं मधुरं रमणं मधुरम्।
वमितं मधुरं शमितं मधुरं,
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

गुंजा मधुरा माला मधुरा,
यमुना मधुरा वीची मधुरा।
सलिलं मधुरं कमलं मधुरं,
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

गोपी मधुरा लीला मधुरा,
युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम्।
दृष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं,
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

गोपा मधुरा गावो मधुरा,
यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा।
दलितं मधुरं फलितं मधुरं,

मधुराधिपते अखिलं मधुरम्॥
(इति श्रीमद्वल्लभाचार्यविरचितं मधुराष्टकं सम्पूर्णं।)

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अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी वल्लभं॥

कौन कहता है भगवान, आते नहीं,
तुम मीरा के जैसे, बुलाते नहीं।

अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी वल्लभं॥

कौन कहता है भगवान, खाते नहीं,
बेर शबरी के जैसे, खिलाते नहीं।

अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी वल्लभं॥

कौन कहता है भगवान, सोते नहीं,
माँ यशोदा के जैसे, सुलाते नहीं।

अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी वल्लभं॥

कौन कहता है भगवान नाचते नहीं,
गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं।

अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी वल्लभं॥

अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी वल्लभं॥

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सतगुरु मैं तेरी पतंग, सतगुरु मैं तेरी पतंग,
हवा विच उडदी जावांगी, हवा विच उडदी जावांगी ।
साईंया डोर हाथों छोड़ी ना, मैं कट्टी जावांगी ।

बड़ी मुश्किल दे नाल मिलया,
मेनू तेरा दवारा है, बाबा तेरा द्वारा है,
मेनू इको तेरा आसरा,

नाल तेरा सहारा है, बाबा तेरा सहारा है ।
हुन तेरे ही भरोसे, हवा विच उडदी जावांगी,
साईंया डोर हाथों छोड़ी ना, मैं कट्टी जावांगी ।

सतगुरु मैं तेरी पतंग, सतगुरु मैं तेरी पतंग,
हवा विच उडदी जावांगी, हवा विच उडदी जावांगी।
साईंया डोर हाथों छोड़ी ना, मैं कट्टी जावांगी ।

ऐना चरना कमला नालो,
मेनू दूर हटावी ना, बाबा दूर हटावी ना,
इस झूठे जग दे अंदर,
मेरा पेचा लाई ना, बाबा पेचा लाई ना ।
जे कट गयी ता सतगुरु, फिर मैं लुट्टी जावांगी,
साईंया डोर हाथों छोड़ी ना, मैं कट्टी जावांगी

सतगुरु मैं तेरी पतंग, सतगुरु मैं तेरी पतंग,
हवा विच उडदी जावांगी, हवा विच उडदी जावांगी।

साईंया डोर हाथों छोड़ी ना, मैं कट्टी जावांगी

अज्ज मलेया बूहा आके, मैं तेरे द्वार दा,
हाथ रख दे एक वारि तूं, मेरे सर ते प्यार दा
फिर जनम मरण दे गेडे, तो मैं बच्दी जावांगी
साईंया डोर हाथों छोड़ी ना, मैं कट्टी जावांगी॥

सतगुरु मैं तेरी पतंग, सतगुरु मैं तेरी पतंग,
हवा विच उडदी जावांगी, हवा विच उडदी जावांगी।
साईंया डोर हाथों छोड़ी ना, मैं कट्टी जावांगी
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गुरु मेरी पूजा, गुरु गोविंदा,
गुरु मेरा पारब्रह्म, गुरु भगवंता ।

गुरु मेरा देव, अलख अभेव,
सरब पूज्य, चरण गुरु सेवू ।

गुरु बिन अवर, नहीं मैं ध्याउ,
अन दिन जपो, गुर गुर नाओ ।

गुरु मेरी पूजा, गुरु गोविंदा,
गुरु मेरा पारब्रह्म, गुरु भगवंता ।

गुरु मेरा ग्यान, गुरु ह्रदय ध्यान,
गुरु गोपाल, पुरख भगवान् ।

गुरु की सरन, रहूँ कर जोर,
गुरु बिना मैं नाही होर ।

गुरु बोहित, तारे भव पार,
गुरु सेवा, ते यम छुटकार ।

गुरु मेरी पूजा, गुरु गोविंदा,
गुरु मेरा पारब्रह्म, गुरु भगवंता ।

अन्धकार में, गुरु मन्त्र उजारा,
गुरु कै संग, सगल निस्तारा ।

गुरु पूरा, पाईये वडभागी,
गुरु की सेवा, दुःख ना लागी ।

गुरु का सबद, ना मेटे कोई,
गुरु नानक, नानक हर सोए ।

गुरु मेरी पूजा, गुरु गोविंदा,
गुरु मेरा पारब्रह्म, गुरु भगवंता ।

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अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में
है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में,
है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में

मेरा निश्चय बस एक यही, एक बार तुम्हे मैं पा जाऊं,
अर्पण कर दूँ दुनिया भर का, सब प्यार तुम्हारे हाथों मे

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में,
है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में

जो जग में रहूँ, तो ऐसे रहूँ, ज्यों जल में कमल का फूल रहे,
मेरे गुण दोष समर्पित हों, भगवान तुम्हारे हाथों में

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में,
है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में

यदि मानुष का मुझे जनम मिले, तव चरणों का मै पुजारी बनू,
इस पूजक की एक एक रग का, सब तार तुम्हारे हाथों में

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में,
है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में

जब जब संसार का कैदी बनू, निष्काम भाव से कर्म करूँ,
फिर अंत समय में प्राण तजू, निराकार तुम्हारे हाथों में

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में,
है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में

मुझ में तुझ में बस भेद यही, मैं नर हूँ, आप नारायण हो,
मैं हूँ संसार के हाथों में, संसार तुम्हारे हाथों में

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों मे
है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में
है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में

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नाम जपन क्यों छोड़ दिया,
क्रोध न छोड़ा, झूठ न छोड़ा
सत्य बचन क्यों छोड दिया,
मन सत्य बचन क्यों छोड दिया

नाम जपन क्यों छोड़ दिया,
मन नाम जपन क्यों छोड़ दिया

झूठे जग में दिल ललचा कर,
असल वतन क्यों छोड दिया
असल वतन क्यों छोड दिया
नाम जपन क्यों छोड़ दिया

नाम जपन क्यों छोड़ दिया,
मन नाम जपन क्यों छोड़ दिया

कौड़ी को तो खूब सम्भाला,
लाल रतन क्यों छोड दिया,
लाल रतन क्यों छोड दिया
नाम जपन क्यों छोड़ दिया

नाम जपन क्यों छोड़ दिया,
मन नाम जपन क्यों छोड़ दिया

जिन सुमिरन से अति सुख पावे,
सो सुमिरन क्यों छोड़ दिया
तूने नाम जपन क्यों छोड़ दिया

नाम जपन क्यों छोड़ दिया,
मन नाम जपन क्यों छोड़ दिया

खालिस इक भगवान भरोसे,
तन मन धन क्यों ना छोड़ दिया
नाम जपन क्यों छोड़ दिया

मन नाम जपन क्यों छोड़ दिया
क्रोध न छोड़ा, झूठ न छोड़ा
सत्य बचन क्यों छोड दिया,

नाम जपन क्यों छोड़ दिया
मन नाम जपन क्यों छोड़ दिया
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जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को,  मिल जाये तरुवर की छाया
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है मैं जब से शरण तेरी आया, मेरे राम ।

सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को, मिल जाये तरुवर की छाया ।

भटका हुआ मेरा मन था कोई,
मिल ना रहा था सहारा,
लहरों से लडती हुई नाव को जैसे,
मिल ना रहा हो किनारा ।
उस लडखडाती हुई नाव को जो,
किसी ने किनारा दिखाया,
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया, मेरे राम ।

सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को, मिल जाये तरुवर की छाया ।

शीतल बने आग चन्दन के जैसी,
राघव कृपा हो जो तेरी,
उजयाली पूनम की हो जाये राते,
जो थी अमावस अँधेरी ।
युग युग से प्यासी मुरुभूमि ने जैसे सावन का, संदेस पाया,
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया, मेरे राम ।

 सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को, मिल जाये तरुवर की छाया ।

जिस राह की मंजिल तेरा मिलन हो, उस पर कदम मैं बढ़ाऊं,
फूलों मे खारों मे, पतझड़ बहारो मे, मैं ना कभी डगमगाऊँ ।
पानी के प्यासे को तकदीर ने, जैसे जी भर के अमृत पिलाया,
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया, मेरे राम ।

सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को, मिल जाये तरुवर की छाया,
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया, मेरे राम ।

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माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रोंदे मोहे,
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रोंदूगी तोहे
आये हैं तो जायेंगे, राजा रंक फ़कीर,
एक सिंहासन चढ़ि चले, एक बंधे जंजीर

दुर्बल को ना सतायिये, जाकी मोटी हाय,
बिना जीभ के हाय से, लोहा भस्म हो जाए

माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रोंदे मोहे,
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रोंदूगी तोहे

चलती चक्की देख के, दिया कबीरा रोये,
दो पाटन के बीच में, साबुत बचा ना कोई

तुलसी तुलसी सब कहे, तुलसी वन की घास,
हो गयी कृपा श्री राम की, तो बन गए तुलसीदास

साँच बार बार तप नहीं, झूठ बराबर पाप,
जाके ह्रदय साँच है, ताके ह्रदय प्रभु आप

दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करे ना कोई,
जो सुख में सुमिरन करे, दुःख कहे को होए

रहिमन बडन को देख कर, लघु ना दीजिये डार,
जहाँ काम आये सुई, क्या करे तलवार

रहिमन धागा प्रेम का, ना तोड़ो खीच काय,
टूटे पे फिर ना जुडे, जुडे तो गाँठ पड़ी जाय

ऐसी देनी देंन ज्यो, कित सिखऐ हो सेन,
जो जो कर ऊंचो करो, क्यों तो नीचे नैन

देंनहार कोई और है, भेजत जो दिन रैन,
लोग भ्रम हम पर करे, ता सो नीचे नैन

तुलसी इस संसार में, सबसे मिलिए भाये,
ना जाने किस रूप में, नारायण मिल जाए,
ना जाने किस रूप में, नारायण मिल जाए
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क्षमा करो तुम मेरे प्रभुजी, अब तक के सारे अपराध,
धो डालो तन की चादर को, लगे है उसमे जो भी दाग

क्षमा करो, क्षमा करो, क्षमा करो, प्रभु क्षमा करो

तुम तो प्रभुजी मानसरोवर, अमृत जल से भरे हुए,
पारस तुम हो, इक लोहा मै, कंचन होवे जो ही छुवे
तज के जग की सारी माया, तुमसे कर लू मै अनुराग,
धो डालो तन की चादर को, लगे है उसमे जो भी दाग

क्षमा करो तुम मेरे प्रभुजी, अब तक के सारे अपराध,
धो डालो तन की चादर को, लगे है उसमे जो भी दाग

काम क्रोध में फंसा रहा मन, सच्ची डगर नहीं जानी,
लोभ मोह मद में रहकर प्रभु, कर डाली मनमानी
मनमानी में दिशा गलत लें, पंहुचा वहां जहाँ है आग,
धो डालो तन की चादर को, लगे है उसमे जो भी दाग

क्षमा करो तुम मेरे प्रभुजी, अब तक के सारे अपराध,
धो डालो तन की चादर को, लगे है उसमे जो भी दाग

इस सुन्दर तन की रचना कर, तुमने जो उपकार किया,
हमने उस सुन्दर तन पर प्रभु, अपराधो का भार दिया,
नारायण अब शरण तुम्हारे, तुमसे प्रीत होये निज राग

क्षमा करो तुम मेरे प्रभुजी, अब तक के सारे अपराध,
धो डालो तन की चादर को, लगे है उसमे जो भी दाग,
क्षमा करो, क्षमा करो, क्षमा करो, प्रभु क्षमा करो ।
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ओ पालनहारे, निर्गुण औ न्यारे,
तुम्हरे बिन हमरा कौनो नाहीं
हमरी उलझन, सुलझाओ भगवन
तुम्हरे बिन हमरा कौनो नाहीं
तुम ही हमका हो संभाले,
तुम ही हमरे रखवाले,

तुम्हरे बिन हमरा कौनो नाहीं । (2)

चन्दा में तुम ही तो भरे हो चांदनी
सूरज में उजाला तुम ही से
यह गगन हैं मगन,
तुम ही तो दिए इसे तारे
भगवन, यह जीवन तुम ही न सवारोगे,
तो क्या कोई सवारे
ओ पालनहारे, निर्गुण और न्यारे,
तुम्हरे बिन हमरा कौनो नाहीं । (2)

जो सुनो तो कहे प्रभुजी हमरी है विनती,
दुखी जन को धीरज दो,
हारे नही वो कभी दुखसे
तुम निर्बल को रक्षा दो,
रहें पाए निर्बल सुख से
भक्ति को शक्ति दो,
भक्ति को शक्ति दो
जग के जो स्वामी हो,
इतनी तो अरज सुनो
हैं पथ मैं अंधियारे,
दे दो वरदान में उजियारे

ओ पालनहारे, निर्गुण और न्यारे,
तुम्हरे बिन हमरा कौनो नाहीं
हमरी उलझन, सुलझाओ भगवन,
तुम्हरे बिन हमरा कौनो नाहीं
ओ पालनहारे, निर्गुण और न्यारे,
तुम्हरे बिन हमरा कौनो नाहीं
हमरी उलझन, सुलझाओ भगवन,
तुम्हरे बिन हमरा कौनो नाहीं
ओ पालनहारे, निर्गुण और न्यारे,
तुम्हरे बिन हमरा कौनो नाहीं,

ओ पालनहारे….ओ पालनहारे….
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तुम मेरी राखो लाज हरि,
तुम जानत सब अन्तर्यामी,
करनी कछु ना करी
तुम मेरी राखो लाज हरि

अवगुन मोसे बिसरत नाहिं,
पलछिन घरी घरी

तुम मेरी राखो लाज हरि,
तुम जानत सब अन्तर्यामी
करनी कछु ना करी,
तुम मेरी राखो लाज हरि

सब प्रपंच की पोट बाँधि कै,
अपने सीस धरी,
तुम मेरी राखो लाज हरि

तुम मेरी राखो लाज हरि,
तुम जानत सब अन्तर्यामी,
करनी कछु ना करी
तुम मेरी राखो लाज हरि

दारा सुत धन मोह दिये हौं,
सुध-बुध सब बिसरी

तुम मेरी राखो लाज हरि,
तुम जानत सब अन्तर्यामी,
करनी कछु ना करी

तुम मेरी राखो लाज हरि

सूर पतित को बेगि उबारो,
अब मोरि नाव भरी
तुम मेरी राखो लाज हरि

तुम मेरी राखो लाज हरि,
तुम जानत सब अन्तर्यामी,
करनी कछु ना करी
तुम मेरी राखो लाज हरि

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राम तुम बड़े दयालु हो
नाथ तुम बड़े दयालु हो (2)

और ना कोई हमारा है
मुझे एक तेरा सहारा है
ये नैया डोल रही मेरी 
हरिजी अब करू न तुम देरी

राम तुम बड़े दयालु हो 
हे नाथ तुम बड़े दयालु हो
हरिजी तुम बड़े दयालु हो

तेरा यश गाया वेदों ने
पार नहीं गाया वेदों ने
नेति नेति गाया वेदों ने

राम तुम बड़े दयालु हो
नाथ तुम बड़े दयालु हो

भले है बुरे है तेरे है
तेरी माया के घेरे है
फिर भी हम बालक तेरे है

राम तुम बड़े दयालु हो
हे नाथ तुम बड़े दयालु हो

जनम जनम भुला फिरा
पाया राम ना नाम
अब की यदि सयोंग हो
सिमरूं मैं आठूं याम

तुम्हारा नाम मिले भगवन
सुबह और शाम मिले भगवान
भक्ति का दान मिले भगवन

राम तुम बड़े दयालु हो
हे नाथ तुम बड़े दयालु हो
हरिजी तुम बड़े दयालु हो
बोलो श्री राम जय राम जय जय राम
श्री राम जय राम जय जय राम

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लाडली अद्बुत नज़ारा, तेरे बरसाने में है।

लाडली अद्बुत नज़ारा, तेरे बरसाने में है।
बेसहारों को सहारा, तेरे बरसाने में है ॥
लाडली अद्बुत नज़ारा, तेरे बरसाने में है।

झांकीया तेरे महल की, कर रहे सब देवगण।
आगया बैकुंठ सारा, तेरे बरसाने में है॥

लाडली अद्बुत नज़ारा, तेरे बरसाने में है।
बेसहारों को सहारा, तेरे बरसाने में है ॥

हर लता हर पात में है, तेरी दया की वो झलक।
हर घडी यशोमती दुलारा, तेरे बरसाना में है॥

लाडली अद्बुत नज़ारा, तेरे बरसाने में है।
बेसहारों को सहारा, तेरे बरसाने में है ॥

अब कहाँ जाऊं किशोरी तेरे दर को छोड़ कर।
मेरे जीवन का सहारा तेरे बरसाने में है॥

लाडली अद्बुत नज़ारा, तेरे बरसाने में है।
बेसहारों को सहारा, तेरे बरसाने में है ॥

यूँ तो सारे बृज में ही है तेरी लीला का प्रताप।
पर अनोखा ही नज़ारा, तेरे बरसाने में है ॥

लाडली अद्बुत नज़ारा, तेरे बरसाने में है।
बेसहारों को सहारा, तेरे बरसाने में है ॥

मैं भला हूँ या बुरा हूँ पर तुम्हारा हूँ सदा।
अब तो जीवन का किनारा तेरे बरसाने में है॥

लाडली अद्बुत नज़ारा, तेरे बरसाने में है।
बेसहारों को सहारा, तेरे बरसाने में है ॥